किडनी के रोगी अपने दिल की धड़कनों का भी रखें खास ख्याल

वॉशिंगटन। शोधकर्ताओं का कहना है कि गंभीर किडनी रोग वाले मरीजों को आर्टिएल फिब्रिलेशन (अनियमित दिल की धड़कन की स्थिति) होने का खतरा दोगुना अधिक होता है। आर्टिएल फिब्रिलेशन सामान्य आबादी में सबसे आम समस्या है, जो विशेष रूप से किडनी फेल्योर वाले रोगियों में अधिक होती है।

कम किडनी फंक्शन्स वाले रोगियों में बड़ी मात्रा में प्रोटीनयूरिया होता है। यूरीन में जरूरत से अधिक प्रोटीन मौजूद होता है, जिसके साथ ही किडनी डैमेज होने का संकेत भी होता है। ऐसे में जिन लोगों को किडनी की बीमारी नहीं होती है, उनकी तुलना में किडनी के रोगियों को आर्टिएल फिब्रिलेशन होने का जोखिम लगभग 2 गुना अधिक होता है।

वॉशिंगटन विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर निशा बंसल ने कहा कि इस अध्ययन से पता चला है कि किडनी फंक्शन्स में मामूली असामान्यताएं बाद में आर्टिएल फिब्रिलेशन के डेवलप होने के हाई रिस्क से जुड़ी हुई है। कार्डियोवास्कुलर थेरेपी के चयन को आर्टिएल फिब्रिलेशन प्रभावित कर सकता है और यह खराब क्लिनिकल ​​परिणामों के साथ जुड़ा हुआ है। इसलिए किडनी फंक्शन्स में आर्टिएल फिब्रिलेशन के जोखिम को समझना महत्वपूर्ण है।

इस अध्ययन के लिए टीम ने 16,769 लोगों का विश्लेषण किया, जो आर्टिएल फिब्रिलेशन के बिना जी रहे थे। गुर्दे की घटती हुई कार्यप्रणाली के साथ आर्टिएल फिब्रिलेशन के जोखिम में वृद्धि हुई थी। यह अध्ययन अमेरिकी सोसायटी ऑफ नेफ्रोलॉजी (सीजेएएसएन) के क्लीनिकल जर्नल के आगामी अंक में प्रकाशित होगा। इसमें कहा गया है कि गुर्दे के खराब फंक्शन्स वाले व्यक्ति को दिल की धड़कन सामान्य बनाए रखने के लिए प्रिवेंटिव इंटरवेंशन से फायदा हो सकता है।

loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

x

Check Also

मुस्लिम महिलाओं की आजादी ,इंसाफ की जीत

नई दिल्ली। मंगलवार को ट्रिपल तलाक को लेकर एक बड़ा फैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट ...

error: Content is protected !!