किन्नर इस तरह मनाते हैं रक्षाबंधन का त्यौहार

उज्जैन. किन्नर समुदाय एक ऐसा समुदाय है जिसे हमेशा से ही उपेक्षित वर्ग माना गया है, लेकिन इसके विपरीत ये समुदाय हर त्यौहार और फेस्टीवल को सेलिब्रेट करता है। चाहे वो दीवाली हो, होली हो या फिर रक्षाबंधन। आज तक ये सुनने में नहीं आया होगा कि किन्नर भी रक्षाबंधन मनाते हैं। बता दें कि किन्नर भी उसी तरह रक्षाबंधन मनाते हैं जैसे कि आम लोग मनाते हैं उनमें भी भाई बहन का रिश्ता रहता है। आम लोगों की अपेक्षा किन्नरों की लाइफ में इस त्यौहार का कुछ ज्यादा ही महत्व है। ये है किन्नरों के लिए इस त्यौहार का महत्व…
– जानकारी दी कि किन्नरों में ये त्यौहार जन्माष्टमी पर अच्छे से मनाया जाता है लेकिन त्यौहार का दिन होने के कारण श्रावण महिने की पूर्णिमा को हम भाईयों को राखी बांधते हैं।
– किन्नर शुरू से ही अपनी फैमिली से दूर रहते हैं क्यों कि उनकी फैमिली ही उनको इस समुदाय में भेज कर उनसे रिश्ता तोड़ लेती है।
– पीठाधीश्वर मां भवानी ने बताया कि ‘एक किन्नर अपने यार को छोड़ सकता है, लेकिन बनाए हुए भाई को कभी नहीं छोड़ता’।
– इसका कारण पूछने पर मां भवानी ने बताया कि हमारी लाइफ में रिश्तों की जगह नहीं होती क्यों कि हमें शुरू से ही मां-पिता अपने से दूर कर देते हैं, लेकिन यदि हम किसी रिश्ते को निभाते हैं तो मरते दम तक उस रिश्ते का साथ देते हैं।
 आपस में भी बांधते हैं राखी
 – जब किसी किन्नर का कोई भाई नहीं होता तो वो आपस में ही राखी बांधते हैं।
– उसके बाद वो भी अपने उस रिश्ते को निभाते हैं और हर मुश्किल में उनकी मदद करते हैं।
– मिली जानकारी के अनुसार किन्नरों को 2010 तक 2 कैटेगरी में रखा जाता था। जो लंबे बाल और कुछ महिलाओं की तरह होते थे उन्हें फीमेल और जिसकी स्किन हार्ड और दाढ़ी होती है उसे मेल कैटेगरी में रखा जाता था, लेकिन 2014 में उनकी गिनती थर्ड जेंडर में काउंट होना शुरू हुई है।
 राखी से पहले की जाती है इष्ट देव की पूजा
 – मां ने बताया की रक्षाबंधन का त्यौहार के दिन का हर लोगों की तरह उन्हें भी इंतजार रहता है।
– आगे बताया कि इस दिन सुबह अपने-अपने देवस्थान पर जाकर हवन और सावन महिने की विदाई के लिए भगवान शिव की पूजा करते हैं।
– इस मौके पर किन्नर अखाड़े में भी सामूहिक पूजा रखी गई थी।
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